Tuesday, October 20th, 2026

सभापति रमेश यादव की विदाई, विधानपरिषद में सभापति बनने की दौड़ शुरू, समाजवादी पार्टी सबसे बड़ा दल

लखनऊ
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति रमेश यादव का कार्यकाल आज 30 जनवरी रात 12 बजे समाप्त. इसी के साथ विधानपरिषद में सभापति बनने की दौड़ शुरू हो गई है. विधानपरिषद में सदस्यों की संख्या के लिहाज से समाजवादी पार्टी सबसे बड़ा दल है. सभापति का चुनाव होने की स्थिति में जाहिर है,उसकी दावेदारी सबसे मजबूत है. लेकिन दूसरा सबसे बड़े दल बीजेपी अब विधानपरिषद में प्रोटेम स्पीकर का रास्ता अपनाने के मूड में दिख रही है.

उत्तर प्रदेश विधानसभा में अध्यक्ष तो विधानपरिषद मे सभापति चुनने की प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधान है. विधान परिषद में जब-जब सभापति का पद रिक्त होगा, तब-तब परिषद किसी अन्य सदस्य को सभापति चुनेगी. इसके अलावा सभापति और उपसभापति का पद रिक्त है तो राज्यपाल सभापति के कर्तव्य पालन के लिए किसी सदस्य को नियुक्त कर सकते हैं, जिसे प्रोटेम स्पीकर कहा जाता है. विधानपरिषद के सभापति रमेश यादव 30 जनवरी के 12 बजे रात के बाद सभापति नहीं रहेंगे. उनका कार्यकाल खत्म हो जाएगा. ऐसे मे बीजेपी सरकार आज चार नामों का प्रस्ताव बनाकर राज्यपाल को भेजेगी, जिसमें से एक नाम पर राज्यपाल अपना मुहर लगाएंगी.

बता दें यूपी विधान परिषद में अब तक नौ बार प्रोटेम सभापति नियुक्त किए जा चुके हैं जबकि 12 बार चुनाव कराए गए हैं. इसके अलावा सभापति का पद रिक्त होने पर 5 बार कार्यवाहक स्पीकर भी बनाया गया है. संवैधानिक व्यवस्था और परंपरा के अनुसार, सभापति का पद एक दिन भी रिक्त नहीं रहता है.  व्यवस्था को कायम रखने के लिए बीजेपी प्रोटेम स्पीकर से ही काम चलाना चाहेगी.

अगर चुनाव होता है तो बीजेपी के दस विधायकों के पहुंचने के बाद भी सपा के पास अभी सदन मे अधिक विधायक हैं. बीजेपी को उच्च सदन में बहुमत स्थानीय निकाय क्षेत्र की 35 एमएलसी सीटों के चुनाव के बाद ही हासिल हो सकता है. जिसके लिए बीजेपी को इंतजार करना होगा. ऐसे में बीजेपी की कोशिश होगी कि फिलहाल किसी तरह से सभापति का चुनाव न हो और तब तक के लिए राज्यपाल से गैर सपा सदस्य को प्रोटेम स्पीकर नामित कराया जाए. ऐसे में सभापति के पद पर बीजेपी और सपा के बीच जबरदस्त शह-मात का खेल होगा.

 

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Source : Agency

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